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टायफाइड परिचय कारण लक्षण और घरेलू इलाज, जरूर पढ़े!!

टायफाइड परिचय कारण लक्षण और घरेलू इलाज, जरूर पढ़े!!
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Typhoid आंत्र ज्वर टायफाइड – टाइफाइड ।

इसे लोकभाषा में मियादी बुखार के नाम से जाना जाता हैं। इसे मोतीझरा भी कहा जाता हैं। इसका दूसरा नाम एंट्रिक फीवर (आंत्र ज्वर) भी हैं। टायफाइड बुखार साल्मोनेला टायफस नामक बैक्टीरिया से पैदा होता हैं।

कारण।

1. साल्मोनेला नामक सूक्षम जीव का विविध माध्यम जैसे फल सब्जियों, पीने के पानी, दूध इत्यादि के द्वारा मनुष्य के पेट में पहुंचना तथा वहां पर बढ़ते रहना।
2. बाज़ारो में बिकने वाले पदार्थो जैसे गोल गप्पे, खोमचे, चाट पकोड़े, विविध मिठाईया, फलो के रस, आइस क्रीम, कुल्फी अर्थात कोई भी वस्तु जिसमे सफाई का ख़याल ना रखा गया हो के माध्यम से हमारे पेट में पहुँचता हैं। शरीर में पहुँचने के साथ ये तेज़ी से बढ़ने लगते हैं। रक्त के माध्यम से ये यकृत (लिवर) अथवा प्लीहा(स्प्लीन) तक पहुँच जाते हैं।
3. शौच के बाद अगर हाथ भली भांति साफ़ ना किये जाए तो भी इसका खतरा रहता हैं।
कुल मिला कर साफ़ सफाई के अभाव से ये रोग बढ़ता हैं।

लक्षण।

एक बार व्यक्ति संक्रमित हो जाए तो इसके लक्षण सात से चौदह दिनों में दिखने लग जाते हैं। जिनमे विशेष हैं –
सिर में दर्द, गले में खराश तथा दुर्बलता के साथ साथ तेज़ बुखार आना, वक्ष एवं पेट पर लाल रंग के निशान पैदा होना। बुखार दिन प्रतिदिन बढ़ता रहता हैं और ये एक सो तीन से एक सो चार फरेनाइट तक रहता हैं।
ठण्ड लगना और पसीना आना।
हाथ व् पैरो में दर्द होना।
कुछ रोगियों को उलटी व् दस्त भी हो सकते हैं, भूख बंद हो जाती हैं, पेट में दर्द होता हैं।
रोग बढ़ने पर तिल्ली व् हड्डियों में सूजन आने लगती हैं, जिस से पेट का आकार बड़ा दिखाई देने लगता हैं। आंतो की दीवार पर घाव बनना तथा उस से रक्तस्त्राव होना संभव हैं।

उपद्रव।

आंतो में छेद हो सकता हैं और आंतो से रक्तस्त्राव होना संभव हैं।
खून की खांसी आना संभव हैं तथा न्यूमोनिया भी हो सकता हैं।
कुछ रोगियों में बहरापन भी आ सकता हैं। जब यही संक्रमण दिमाग तक पहुंची जाता है, तो चक्कर आना, लकवा आना, बेहोशी आने जैसे लक्षण उपस्थित होने लगते हैं। इसी प्रकार वृक्कों में संक्रमण हो जाने पर गुर्दा फेल हो सकता हैं। हड्डियों में जब यही संक्रमण फ़ैल जाता हैं, तो हड्डियों में पस (मवाद) भर जाता हैं।

कुछ घरेलू इलाज :

1. पान का रस, अदरक का रस और शहद को बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम पीने से आराम मिलता है। •

2. यदि जुकाम या सर्दी-गर्मी में बुखार हो तो तुलसी, मुलेठी, गाजवां, शहद और मिश्री को पानी में मिलाकर काढा बनाएं और पीएं। इससे जुकाम सही हो जाता है और बुखार भी जल्द ही उतर जाता है।

3. गर्मी के मौसम में टायफायड होने पर लू लगने के कारण बुखार होने का खतरा रहता है। ऐसे में आप कच्चे आम को आग या पानी में पकाकर इसका रस पानी के साथ मिलाकर पीएं।

4. जलवायु परिवर्तन की वजह से बुखार होने तुलसी की चाय पीने से आराम मिलता है। इसके लिए 20 तुलसी की पत्तियां, 20 काली मिर्च, थोड़ी सी अदरक, जरा सी दालचीनी को पानी में डालकर खूब खौलाएं। अब इस मिश्रण को आंच से उतारकर छानें और इसमें मिश्री या चीनी मिलाकर गर्म-गर्म पीएं।

5. तुलसी और सूर्यमुखी के पत्तों का रस पीने से भी टायफायड बुखार ठीक होते हैं। करीब तीन दिन तक सुबह-सुबह इसका प्रयोग करें।

6. पानी खूब पीएं और पीने के पानी को पहले गर्म करें और उसे ठंडा होने के बाद पीये। अधिक पानी पीने से शरीर का जहर पेशाब और पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकल जाता है।

7. लहसुन की कली पांच से दस ग्राम तक काटकर तिल के तेल में या घी में तलकर सेंधा नमक डालकर खाने से सभी प्रकार का बुखार ठीक होता है।

8. तेज बुखार आने पर माथे पर ठंडे पानी का कपड़ा रखें तो बुखार उतर जाता है,और बुखार की गर्मी सिर पर नहीं चढ़ती है। फ्लू में प्याज का रस बार-बार पीने से बुखार उतर जाता है,और कब्ज में भी आराम मिलता है।

9. पुदीना और अदरक का काढ़ा पीने से बुखार उतर जाता है। काढ़ा पीकर घंटे भर आराम करें, बाहर हवा में न जाएं।

विशेष : –

टाइफाइड के दौरान और ठीक हो जाने के बाद भी, फलों या इनके रस का सेवन विशेष लाभकारी होता है – विशेष तौर पर मौसमी और अनार का. पर यह ध्यान रहे कि रस निकालते समय सफाई के साथ कोई समझौता न हो। – ठीक हो जाने के बाद भी कम से कम 3-4 सप्ताह, वर्ना 6-7 सप्ताह तक गरिष्ठ भोजन से बचें। मरीज को लंबे समय तक परहेज करना पड़ता है। मरीज को हल्का व सुपाच्य भोजन करने के साथ ही उबला पानी पीना चाहिए। टायफाइड अधिकतर गंदे पानी के सेवन से होने वाली बीमारी है। उबला हुआ पानी पीने और खान पान पर नियंत्रण रखने से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।

इन घरेलु नुस्खों के साथ साथ डॉक्टरी सलाह और इलाज बेहद ज़रूरी हैं। आप उनके इलाज के साथ में ये प्रयोग करे।

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स्रोत - ओनली आयुर्वेद
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