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मूत्र रोग, स्वपन दोष, प्रमेह आदि के लिए घरेलु नुस्खा, जरूर पढ़े!!

मूत्र रोग, स्वपन दोष, प्रमेह आदि के लिए घरेलु नुस्खा, जरूर पढ़े!!
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किशोरावस्था से निकलते ही जैसे ही हम वयस्क होते हैं तो अनेक रोग हमको घेर लेते हैं, मसलन उनके बारे में पूर्ण ज्ञान ना हो कर हमे इनसे मानसिक तनाव मिलता रहता हैं। थोड़ी सी मानसिक शान्ति और घरेलु उपायो से इन रोगो से बचा जा सकता हैं

आज हम ऐसे ही सरल से घरेलु नुस्खे के बारे में जानेंगे।

शुष्क धनिया ( दाना ) को मोटा-मोटा कूटकर छिलका अलग करें और बीजो के अंदर की गिरी निकालकर 300 ग्राम धनिया की गिरी ( प्राय: 450 ग्राम धनिया में से 300 ग्राम गिरी निकल जाती है ) तथा बराबर वजन 300 ग्राम कुंजा मिश्री  ( या चीनी ) ले। दोनों को अलग-अलग पीसकर आपस में मिला ले। बस, दवा तैयार।

आयुर्वेद में चीनी का मतलब देशी चीनी से होता हैं जो पाउडर की तरह होती हैं। दानेदार चीनी ज़हर के समान हैं।

सेवन विधि-

प्रात: सायं छ: छ: ग्राम की मात्रा से यह चूर्ण बासी पानी के साथ दिन में दो बार ले। प्रात: बिना खाए-पिए रात को बासी पानी से छ: ग्राम फांक ले और तत्प्श्चात एक-दो घंटे तक और कुछ न खाएं। इसी प्रकार छ: ग्राम दवा शाम 4 बजे लगभग प्रात: के रखे हुए पानी के साथ फांक ले। रात का भोजन इसके दो घंटे पश्चात करें। यह मूत्राशय की जलन दूर करने में अद्वितीय है। आवश्यकता अनुसार तीन दिन तक ले।

इस प्रयोग से होने वाले अन्य विशेष लाभ। 

1. मूत्राशय की जलन के अतिरिक्त वीर्य की उत्तेजना दूर करने में यह प्रयोग अचूक है। भयंकर और कठिन से कठिन स्वपनदोष की बीमारी में इसकी पहली दो खुराकों से ही लाभ प्रतीत होगा। इसे इस बीमारी में तीन दिन से सात दिन तक लेना चाहिए।

शौच यदि अधिक पतले दस्त के रूप में होता हो तो दूसरी मात्रा सायं चार बजे लेने की बजाय रात्रि के समय सोनेे से आधा घंटे पहले ले, परन्तु यदि कब्ज की शिकायत अधिक रहती हो तो दूसरी मात्रा सायं चार बजे ही ले और रात्रि सोते समय ईसबगोल की भूसी ( छिलका ) चार-पांच ग्राम से लेकर पंद्रह ग्राम तक ताजा पानी से फाँकिये, बिना किसी कष्ट के शौच होगा। ईसबगोल का उपयोग पहली रात में थोड़ी मात्रा में मतलब ४ ग्राम (एक चम्मच) से करे । यदि इससे लाभ न हो तो दूसरी रात्रि को इसकी मात्रा बढ़ा जब तक की प्रात: शौच साफ होने लगे ( चार-पांच ग्राम से लेकर पंद्रह ग्राम तक का यही मतलब है) ईसबगोल एक हानिरहित कब्जनाशक होने के अतिरिक्त पतले वीर्य को गाढ़ा करने, स्वप्नदोष और मूत्राशय की उत्तेजना दूर करने के लिए उपरोक्त ओषधि की विशेष सहायता करता है।

2. इस औषिधि के सेवन से जहां प्रमेह नष्ट होता है, वहीँ प्रमेह, स्वप्नदोष या योन अव्यवस्थाओं के परिणामस्वरूप होने वाले रोगो जैसे नजर की कमजोरी, धुंधलाहट, सिरदर्द, चक्कर, नीद न आना आदि में अतयंत हितकारी है और पोटेशियम ब्रोमाइड की तरह दिल और दिमाग को कमजोर नही करती बल्कि इन्हे बल मिलता है।

3. वीर्य की उत्तेजना और स्वप्नदोष में केवल भुजंगासन के उचित अभ्यास से स्थायी लाभ होता है।

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स्रोत - ओनली आयुर्वेद
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